Edible Oil: फरवरी में खाने वाले तेल का आयात 23 फीसदी बढ़कर हुआ 9.84 लाख टन

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Edible Oil Imports: भारत का खाद्य तेल (Edible oil) का आयात फरवरी में 23 प्रतिशत बढ़कर 9,83,608 टन पर पहुंच गया. इसका मुख्य कारण रिफाइंड पामतेल के आयात में भारी वृद्धि होना है. उद्योग निकाय सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) ने सोमवार को यह जानकारी दी. पिछले साल इसी महीने में खाद्य तेल का आयात 7,96,568 टन रहा था.

खाद्य तेलों का आयात बढ़ा
SEA ने एक बयान में कहा कि फरवरी 2021 के 8,38,607 टन के आयात की तुलना में इस बार वनस्पति तेलों का कुल आयात बढ़कर 10,19,997 टन हो गया. कुल वनस्पति तेलों के आयात में खाद्य तेलों का आयात फरवरी, 2021 के 7,96,568 टन से बढ़कर इस बार 9,83,608 टन हो गया.

पाम तेल का आयात 3,02,928 टन हुआ
रिफाइंड पाम तेल का आयात 6,000 टन से बढ़कर 3,02,928 टन हो गया. गैर-खाद्य तेल का आयात पिछले महीने घटकर 36,389 टन ​​रह गया, जो एक साल पहले की समान अवधि में 42,039 टन था.

जानें किन तेलों का घटा आयात
एसईए ने कहा कि आरबीडी पामोलिन का आयात 21,601 टन से बढ़कर 5,19,450 टन हो गया. इसके उलट, कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का आयात 24,89,105 टन से घटकर 15,62,639 टन रह गया. भारत आमतौर पर प्रतिमाह लगभग 1.75-2 लाख टन सूरजमुखी तेल का आयात करता है.

सूरजमुखी तेल की आपूर्ति हुई प्रभावित
एसईए ने कहा, ‘रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष ने सूरजमुखी तेल की आपूर्ति को प्रभावित किया है. फरवरी, 2022 में लगभग 1,52,000 टन सूरजमुखी तेल भारत आया और मार्च, 2022 में समान मात्रा में सूरमुखी तेल आने की संभावना है, क्योंकि युद्ध से पहले लदान वाले मालवाहक पोत चालू माह के दौरान भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचेंगे.’’

सूरजमुखी तेल के आयात में आ सकती है गिरावट
एसईए ने कहा कि यदि युद्ध जारी रहता है, तो बाद के महीनों में सूरजमुखी तेल के आयात में गिरावट आ सकती है. हालांकि, सूरजमुखी तेल की उपलब्धता में कमी को सोयाबीन और सरसों के तेल की उच्च घरेलू उपलब्धता से पूरा किया जा सकता है.

बिक्री की सीमा को बढ़ाने की मांग
एसईए ने बताया कि नौ मार्च को इंडोनेशिया सरकार द्वारा घरेलू बिक्री की सीमा को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने की घोषणा से इंडोनेशियाई निर्यात की मात्रा में और कमी आएगी और वैश्विक निर्यात आपूर्ति में कमी आएगी. बयान में कहा गया है, ‘इन दो कारकों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में भारी उतार-चढ़ाव आया है.’

रिफाइनिंग उद्योगों को मिलेगी राहत
वित्त मंत्रालय ने कच्चे पाम तेल के आयात पर कृषि अवसंरचना और विकास उपकर को मौजूदा 7.5 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया है. इस प्रकार सीपीओ और आरबीडी के तेलों के बीच शुल्क अंतर को पहले के 5.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.25 प्रतिशत कर दिया है. एसईए ने कहा, ‘इससे संकटग्रस्त रिफाइनिंग उद्योग को थोड़ी राहत मिली, लेकिन इतना पर्याप्त नहीं है.’

जानें कहां से होता है आयात?
इंडोनेशिया और मलेशिया भारत को पाम तेल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश हैं. कच्चा सोयाबीन तेल मुख्य रूप से अर्जेंटीना और ब्राजील से आयात किया जाता है, जबकि कच्चा सूरजमुखी तेल यूक्रेन और रूस से आयात किया जाता है.

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